भारत में कैसे छपता है रुपया?, How Indian currency Notes are printed?

भारत में कैसे छपता है रुपया? जाने पूरी प्रक्रिया!| How Indian currency Notes are printed?

भारत में कैसे छपता है रुपया


हम जिन चीजों को अपनी रोजबरोज की जिंदगी में उपयोग करते है उनके बारे में जानना भी बहुत जरुरी है। और पैसा तो हमारा जिंदगी का एक अहम हिस्सा है इसके बारे में तो हमें पता ही होना चाहिए हर देश की कैरेंसी अलग- अलग है भारत की कैंरेसी को रुपया कहा जाता है।
हर किसी को पैसा चाहिए पर क्या आपके दिमाग में कभी यह प्रश्न आया है कि आपकी लगभग हर समस्या का समाधान करने वाले ये नोट आते कहां से हैं? मतलब इनकी छपाई कहा होती है? नोट बनाने में कितना खर्च होता है? नोट और सिक्के बनाने का अधिकार किसको है? नोट बनाएं कहां जाते हैं? अगर आप भी यह जानना चाहते हैं, तो हम लाए हैं आपके सवालों के जवाब 

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कौन छापता है नोट और कौन तय करता है कितने नोट छापने हैं?

How Indian currency Notes are printed?


भारत में नोट छापने का एकाधिकार भारतीय रिज़र्व बैंक के पास है। भारतीय रिजर्व बैंक पूरे देश में एक रुपये के नोट को छोड़कर सभी नोट छापता है। एक रुपये के नोट छापने और सभी प्रकार के सिक्के बनाने का अधिकार वित्त मंत्रालय के पास है। जबकि ध्यान देने वाली बात यह है कि पूरे देश में मुद्रा की पूर्ति (नोट और सिक्के दोनों) करने का अधिकार केवल भारतीय रिजर्व बैंक के पास ही है।

भारतीय रिजर्व बैंक:-

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की स्थापना 1935 में आरबीआई अधिनियम 1934 द्वारा की गई थी। आरबीआई भारत की सर्वोच्च मौद्रिक संस्था है। यह खासतौर पर विदेशी रिजर्व, भारत सरकार के बैंकर और ऋण नियंत्रक के रूप में काम करता है। आरबीआई के पास भारतीय अर्थव्यवस्था में नोटों की छपाई और पैसों की आपूर्ति का प्रबंधन करने की जिम्मेदारी भी होता है। भारतीय रिजर्व बैंक की शुरूआत पांच करोड़ रुपये की धनराशि के साथ की गई थी। 

भारत में कितने रुपए छापना है ओ कोन तय करता है?


भारत में कितनी मुद्रा छापी जाएगी ये न्यूनतम आरक्षी प्रणाली द्वारा निर्धारित किया जाता है। साल 1957 से यह प्रणाली पूरे देश में इसी तरह से काम कर रही है। इस प्रणाली के अनुसार आरबीआई को 200 करोड़ की संपत्ति अपने पास रखनी होती है, जिसमे 115 करोड़ रुपये के सोने का भण्डार और 85 रुपये करोड़ की विदेशी मुद्रा रखनी अनिवार्य है। इतनी संपत्ति अपने पास रखने के बाद आरबीआई अर्थव्यवस्था की जरुरत के हिसाब से कितनी भी मात्रा में नोट छाप सकता है। इसे ही न्यूनतम आरक्षी प्रणाली कहा जाता है।

कहां छपते हैं नोट?

हमारे देश में नोट छापने के लिए चार बैंक नोट प्रेस है और चार टकसाल है, सिक्के ढालने वाली जगह को टकसाल कहा जाता है और नोट छापने में प्रयोग होने वाले कागज के लिए एक पेपर मिल है।

नोट प्रेस प्रेस के बारे मैं जानकारी
नोट प्रेस देवास (मध्यप्रदेश) देवास नोट प्रेस में साल में 265 करोड़ रुपए के नोट छपते हैं जिसमें 20, 50, 100, 500, रूपए के नोट छापे जाते हैं. मध्‍यप्रदेश के देवास में ही नोटों में प्रयोग होने वाली स्याही का प्रोडक्‍शन होता है.
करेंसी प्रेस नोट नासिक (महाराष्ट्र) करेंसी प्रेस नोट नासिक में साल 1991 से 1, 2, 5, 10, 50, 100 रुपए के नोट छापे जाते हैं. पहले यहां सिर्फ 50 और 100 रुपए के नोट ही छापे जाते थे लेकिन अब नासिक में 2000 और 500 के नए नोट भी छापे जा रहे हैं.
इसके अलावा पश्चिम बंगाल के सालबोनी और कर्नाटक के मैसूर में भी नोट प्रेस हैं। मैसूर में पहले 1000 रुपये के नोट छपते थे।

आइए अब जानते हैं कि किस नोट को बनाने में कितना खर्च आता है?

नोट खर्च
1 रुपया नोट छापने में 1.14 रुपये खर्च होते हैं, यह एकमात्र ऐसा नोट है जिसकी बाजार कीमत वास्तविक लागत से ज्यादा है।
5 रुपया नोट छापने में 48 पैसे का खर्च आता है।
10 रुपया नोट छापने में 96 पैसा का खर्च आता है
20 रुपया नोट छापने में 96 पैसा का खर्च आता है
50 रुपया नोट छापने में 1.81 रुपये का खर्च आता है।
100 रुपया 100 रुपये का नोट छापने में 1.20 रुपये का खर्च आता है।
200 रुपया 200 रुपये का नोट छापने में 2.15 रुपये का खर्च आता है।
500 रुपया 500 रुपये का नोट छापने में 2.13 रुपये का खर्च आता है।
2000 रुपया 2000 रुपये का नोट छापने में 3.53 रुपये का खर्च आता है।


भारत में चार जगहों पर सिक्के ढाले जाते हैं |

1. मुंबई
2. कोलकाता
3. हैदराबाद
4. नोएडा

स्विजरलैंड से आती है स्याही

भारतीय नोटों को तैयार करने में एक विशेष प्रकार की स्याही का इस्तेमाल किया जाता है। इस विशेष स्याही की अधिकांश मात्रा को स्विजरलैंड की कंपनी सिक्पा से आयात की जाती है। इस स्याही का बड़ा हिस्सा मध्य प्रदेश के देवास स्थित बैंकनोट प्रेस में होता है।

होशंगाबाद में बनता करेंसी का पेपर

भारतीय मुद्रा में इस्तेमाल होने वाली कागज का निर्माण होशंगाबाद की पेपर मिल में किया जाता है। होशंगाबाद पेपर मिल में भारतीय नोटों के कागज के अलावा स्टंप के लिए कागज भी बनाए जाते हैं। साथ ही एक बड़ा हिस्सा इंग्लैंड और जापान को भी निर्यात किया जाता है।

एक शीट से छपते हैं 32 से 48 नोट

नोट छापने के लिए सबसे पहले विदेश या होशंगाबाद से आई पेपर शीट को एक विशेष मशीन सायमंटन के भीतर डाला जाता है जिसके बाद उसे कलर के लिए एक अन्य मशीन जिसे इंटाब्यू कहते हैं से गुजरना होता है। इसके बाद यानी कि शीट पर नोट छप जाते हैं। इस प्रक्रिया के बाद अच्छे और खराब नोट की छटनी की जाती है। आपको बता दें कि एक शीट में करीब 32 से 48 नोट होते हैं।


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