मौर्य कालीन कला: अशोक स्तंभ का इतिहास और इसके बारे में सम्पूर्ण जानकारी


क्या जिन शेयरों के चित्र रुपयों पैसे पर देखते हैं उनका एक लंबा इतिहास है। उन्हें पत्थरों को काटकर बनाया गया और फिर उन्हें सारनाथ में एक विशाल स्थान पर स्थापित किया गया था। इतिहास के महानतम राजाओं में से एक,अशोक के निर्देश पर इसके जैसे कई स्तंभों और पत्थरों पर अभिलेख उत्कीर्ण किए गए।
अशोक जी साम्राज्य पर शासन करते थे उसकी स्थापना उनके दादा चंद्रगुप्त मौर्य ने लगभग 2300 साल पहले की थी। चाणक्य या कौटिल्य नाम के एक बुद्धिमान व्यक्ति ने चंद्र ग्रुप की सहायता की थी। चाणक्य के विचार में अर्थशास्त्र नाम की किताब में मिलते हैं।
मौर्य वंश - प्रथम राजा चंद्रगुप्त बाद में उसके बेटा बिंदुसार और बिंदुसार का पुत्र अशोक

अशोक स्तंभ का इतिहास - History of Ashok Stambh


       अशोक का कलिंग युद्ध: कलिंग तटवर्ती उड़ीसा का प्राचीन नाम है। अशोक ने कलिंग को जीतने के लिए युद्ध लड़ा। लेकिन युद्ध जनित हिंसा और खून खराबा देखकर उन्हें युद्ध से वितृष्णा हो गई। उन्होंने निर्णय लिया कि वे भविष्य में कभी युद्ध नहीं करेंगे। बाद में कलिंग विजय के बाद मथुरा निवासी बौद्ध भिक्षु उपगुप्त के कहने पर बौद्ध धर्म स्वीकार किया।
         बौद्ध धर्म का अनुयायी (Buddhist) बनने के बाद सम्राट अशोक ने भारत के अलावा बाहर के देशों में भी बौद्ध धर्म का प्रचार करवाया। उसने अपने पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा को बौद्ध धर्म का प्रचार करने के लिए श्रीलंका भेजा था। अशोक ने तीन वर्ष में चौरासी हजार स्तूपों का निर्माण कराया और भारत के कई स्थानों पर उसने स्तंभ भी निर्मित करवाया। अपनी विशिष्ट मूर्तिकला के कारण ये स्तंभ सबसे अधिक प्रसिद्ध हुए। वास्तव में सारनाथ का स्तंभ धर्मचक्र प्रवर्तन की घटना का एक स्मारक था और धर्मसंघ की अक्षुण्णता (Intactness) को बनाए रखने के लिए इसकी स्थापना की गई थी।

कैसे बनाया गया अशोक स्तंभ - How Ashoka's pillar was made

सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ को सुनार के बलुआ पत्थर यह लगभग 45 फुट लंबे प्रस्तर खंड से निर्मित किया गया था। धरती में गड़े हुए आधार छोड़कर इसका डंडा गोलाकार है, जो ऊपर की और क्रमश पतला होता जाता है।

अशोक स्तंभ में शेरों का महत्व - Important of Ashok Stambh Lion


बौद्ध धर्म में शेर को बुद्ध का पर्याय माना गया है | बुद्ध के पर्यायवाची शब्दों में शाक्यसिंह और नरसिंह शामिल हैं। यह हमें पालि गाथाओं में मिलता है | इसी कारण बुद्ध द्वारा उपदेशित धम्मचक्कप्पवत्तन (Dhammacakkappavattana) सुत्त को बुद्ध की सिंहगर्जना कहा गया है |
ये दहाड़ते हुए सिंह धम्म चक्कप्पवत्तन के रूप में दृष्टिमान हैं | बुद्ध को ज्ञान प्राप्त होने के बाद भिक्षुओं(Monks) ने चारों दिशाओं में जाकर लोक कल्याण हेतु बहुजन हिताय बहुजन सुखाय का आदेश इसिपतन (मृगदाव) में दिया था, जो आज सारनाथ के नाम से विश्विविख्यात है | इसलिए यहाँ पर मौर्य काल के तीसरे सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के पौत्र चक्रवर्ती अशोक महान ने स्तंभ के चारों दिशाओं में सिंह गर्जना करते हुए शेरों (Roaring Lion) को बनवाया था। इसे ही वर्तमान में अशोक स्तम्भ के नाम से जाना जाता।

भारत में अशोक स्तंभ कहां कहां स्थित है- where is Ashok stambh in India


जैसा कि हम आपको बता चुके हैं कि सम्राट अशोक ने  भारत के विभिन्न हिस्सों में बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए स्तंभों का निर्माण कराया और बुद्ध के उपदेशों को इन स्तंभों पर शिलालेख के रुप में उत्कीर्ण कराया। यहां हम आपको अशोक महान द्वारा बनवाये गए कुछ मुख्य स्तंभों के बारे में बताने जा रहे हैं।

अशोक स्तंभ सारनाथ- Ashok pillar Sarnath


वाराणसी के निकट सारनाथ में पाया गया लगभग एक सौ साल पहले खोजे गई मौर्यकालीन स्तंभ शीर्ष, जो सिंह शीर्ष (Lion Capital) के नाम से प्रसिद्ध है, मौर्यकालीन मूर्ति-परंपरा का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण हैं। यह आज हमारा राष्ट्रीय प्रतीक भी है। यह बड़ी सावधानी से उकेरा गया है। इसकी गोलाकार वेदी पर दहाड़ते हुए चार शेरों की बड़ी-बड़ी प्रतिमाएं स्थापित हैं और उस वेदी के निचले भाग में घोड़ा, सांड, हिरन आदि को गतिमान मुद्रा में उकेरा गया है, जिसमें मूर्तिकार के उत्कृष्ट कौशल की साफ झलक दिखाई देती है। यह स्थान सिर्फ धम्मचक्र प्रवर्तन का मानक प्रतीक है और बुद्ध के जीवन की एक महान ऐतिहासिक घटना का द्योतक हैं।
अब सारनाथ के पुरातत्व संग्रहालय में सुरक्षित रखे गए इस सिंह शीर्ष पर बनी एक वेदी पर चार सिंह एक दूसरे से पीठ जोड़कर बैठाए गए हैं। शेरों की आकृतियां अत्यंत प्रभावशाली एवं ठोस हैं। प्रतिमा कि स्मारकिय विशेषता स्पष्ट: दृष्टिगोचर होती हैं। शेरों के चेहरे का पेशी विन्यास बहुत सृदृढ़ प्रतीत होता है। होठो की विपयरस्त रेखाएं और होठों के अंत में उनके फैलाव का प्रभाव यह दर्शाता है कि कलाकार की अपनी सूक्ष्म दृष्टि शेर के मुख का स्वाभाविक चित्रण करने में सफल रही हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि मानो शेयरों ने अपनी सांस भीतर रोक रखी है। केसर की रेखाएं तीखी है और उनमें उस समय प्रचलित परंपराओं का पालन किया गया है। प्रतिमा की सतह को अत्यधिक चिकना या पॉलिश किया हुआ बनाया गया है, जो की मौर्य कालीन मूर्तिकला की एक खास विशेषता है। शेरों की घुंघराली अयाल राशि आगे निकली हुई दिखाई गई है। शेरों के शरीर के भारी बोझ को पैरों की फैली हुई मांसपेशियों के माध्यम से बखूबी दर्शया गया है।

अशोक स्तंभ इलाहाबाद




यह स्तंभ इलाहाबाद किले के बाहर स्थित है। इसका निर्माण 16 वी शताब्दी में सम्राट अकबर द्वारा करवाया गया था। अशोक स्तंभ के बाहरी हिस्से में ब्राम्ही लीपी में अशोक के अभिलेख लिखे गए है। 200 ई. में समुद्रगुप्त अशोक स्तंभ(Ashok Stambh) को कौशाम्बी से प्रयाग लाया और उसके दरबारी कवि हरिषेण द्वारा रचित प्रयाग-प्रशस्ति इस पर खुदवाया गया। इसके बाद 1605 ई. में इस स्तम्भ पर मुगल सम्राट जहाँगीर के तख्त पर बैठने की कहानी भी इलाहाबाद स्थित अशोक स्तंभ पर उत्कीर्ण है। माना जाता है कि 1800 ई. में स्तंभ को गिरा दिया गया था लेकिन 1838 में अंग्रेजों ने इसे फिर से खड़ा करा दिया।

अशोक स्तंभ वैशाली


यह स्तंभ बिहार राज्य के वैशाली में स्थित है। माना जाता है कि सम्राट अशोक कलिंग विजय(Kalinga Vijay) के बाद बौद्ध धर्म का अनुयायी बन गया था और वैशाली में एक अशोक स्तंभ बनवाया। चूंकि भगवान बुद्ध ने वैशाली में अपना अंतिम उपदेश(Last Preach) दिया था,उसी की याद में यह स्तंभ बनवाया गया था। वैशाली स्थित अशोक स्तंभ अन्य स्तंभो से काफी अलग है। स्तंभ के शीर्ष पर त्रुटिपूर्ण तरीके से एक सिंह की आकृति बनी है जिसका मुंह उत्तर दिशा में है। इसे भगवान बुद्ध की अंतिम यात्रा की दिशा माना जाता है।स्तंभ के बगल में ईंट का बना एक स्तूप(Stup) और एक तालाब है, जिसे रामकुंड के नाम से जाना जाता है। यह बौद्धों के लिए एक पवित्र स्थान है।

अशोक स्तंभ सांची


 यह स्तंभ मध्यप्रदेश के सांची में स्थित है। इस स्तंभ को तीसरी शताब्दी में बनवाया  गया था और इसकी संरचना ग्रीको बौद्ध शैली से प्रभावित है। सांची के प्राचीन इतिहास के अवशेष के रुप में यह स्तंभ आज भी मजबूत है और सदियों पुराना होने के बावजूद नवनिर्मित दिखाई देता है। यह सारनाथ स्तंभ से भी काफी मिलता जुलता है। सांची (Sanchi) स्थित अशोक स्तंभ के शीर्ष पर चार शेर बैठे हैं।

Image सोर्च - wikipedia


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